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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 58: च्यवन ऋषिका भृगुवंशी और कुशिकवंशियोंके सम्बन्धका कारण बताकर तीर्थयात्राके लिये प्रस्थान
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श्लोक 19
श्लोक
13.58.19
एवमुक्तस्तथेत्येवं प्रत्युक्त्वा च्यवनो मुनि:।
अभ्यनुज्ञाय नृपतिं तीर्थयात्रां ययौ तदा॥ १९॥
अनुवाद
कुशिक के ऐसा कहने पर च्यवन ऋषि ने कहा, ‘ऐसा ही हो।’ फिर वे राजा से विदा लेकर तुरंत तीर्थयात्रा के लिए निकल पड़े।
When Kushika said this, the sage Chyavana said 'So be it'. Then he took leave from the king and immediately left for a pilgrimage.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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