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mahabharat 13.58.17: महाबली च्यवन ने पुनः राजा कुशिक से वर मांगने के लिए आग्रह किया। तब राजा इस प्रकार बोले:॥17॥   |   mahabharat अध्याय 13.58: च्यवन ऋषिका भृगुवंशी और कुशिकवंशियोंके सम्बन्धका कारण बताकर तीर्थयात्राके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.58.17 
च्यवनस्तु महातेजा: पुनरेव नराधिपम्।
वरार्थं चोदयामास तमुवाच स पार्थिव:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
महाबली च्यवन ने पुनः राजा कुशिक से वर मांगने के लिए आग्रह किया। तब राजा इस प्रकार बोले:॥17॥
 
The mighty Chyavana once again urged King Kushika to ask for a boon. Then the king spoke thus:॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)