श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 58: च्यवन ऋषिका भृगुवंशी और कुशिकवंशियोंके सम्बन्धका कारण बताकर तीर्थयात्राके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.58.1 
च्यवन उवाच
अवश्यं कथनीयं मे तवैतन्नरपुंगव।
यदर्थं त्वाहमुच्छेत्तुं सम्प्राप्तो मनुजाधिप॥ १॥
 
 
अनुवाद
च्यवन कहते हैं - हे महात्मन! हे मनुष्यों के स्वामी! मैं आपको वह उद्देश्य अवश्य बताऊँगा जिसके लिए मैं यहाँ आया हूँ, अर्थात आपको उखाड़ने के लिए॥1॥
 
Chyavana says - O great man! O lord of all men! I must tell you the purpose for which I had come here, to uproot you. ॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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