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श्लोक 13.58.1  |
च्यवन उवाच
अवश्यं कथनीयं मे तवैतन्नरपुंगव।
यदर्थं त्वाहमुच्छेत्तुं सम्प्राप्तो मनुजाधिप॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| च्यवन कहते हैं - हे महात्मन! हे मनुष्यों के स्वामी! मैं आपको वह उद्देश्य अवश्य बताऊँगा जिसके लिए मैं यहाँ आया हूँ, अर्थात आपको उखाड़ने के लिए॥1॥ |
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| Chyavana says - O great man! O lord of all men! I must tell you the purpose for which I had come here, to uproot you. ॥ 1॥ |
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