Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.56.38-39: कुशिक बोले- प्रभु! हे भृगुश्रेष्ठ! मैं आपके समीप उसी प्रकार रहा हूँ, जैसे कोई धधकती हुई अग्नि के मध्य खड़ा हो। उस अवस्था में होने पर भी मैं जलकर भस्म नहीं हुआ, यही मेरे लिए बड़ी बात है। भृगुनंदन! यही मुझे प्राप्त हुआ महान वरदान है। | mahabharat अध्याय 13.56: महर्षि च्यवनके प्रभावसे राजा कुशिक और उनकी रानीको अनेक आश्चर्यमय दृश्योंका दर्शन एवं च्यवन मुनिका प्रसन्न होकर राजाको वर माँगनेके लिये कहना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुशिक बोले- प्रभु! हे भृगुश्रेष्ठ! मैं आपके समीप उसी प्रकार रहा हूँ, जैसे कोई धधकती हुई अग्नि के मध्य खड़ा हो। उस अवस्था में होने पर भी मैं जलकर भस्म नहीं हुआ, यही मेरे लिए बड़ी बात है। भृगुनंदन! यही मुझे प्राप्त हुआ महान वरदान है।
Kushik said-Lord! O great Bhrigu! I have been near you in the same way as if someone is standing in the middle of a blazing fire. Even after being in that state, I did not burn to ashes, this is a big thing for me. Bhrigu Nandan! This is the great boon I have received.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥