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mahabharat 13.56.21: तत्पश्चात् राजा ने पुनः उन्हें वन के दूसरे भाग में देखा; उस समय वे महामुनि व्रतधारी होकर कुशा पर बैठकर मंत्रोच्चार कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 13.56: महर्षि च्यवनके प्रभावसे राजा कुशिक और उनकी रानीको अनेक आश्चर्यमय दृश्योंका दर्शन एवं च्यवन मुनिका प्रसन्न होकर राजाको वर माँगनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 56: महर्षि च्यवनके प्रभावसे राजा कुशिक और उनकी रानीको अनेक आश्चर्यमय दृश्योंका दर्शन एवं च्यवन मुनिका प्रसन्न होकर राजाको वर माँगनेके लिये कहना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  13.56.21 
ततोऽन्यस्मिन् वनोद्देशे पुनरेव ददर्श तम्।
कौश्यां बृस्यां समासीनं जपमानं महाव्रतम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् राजा ने पुनः उन्हें वन के दूसरे भाग में देखा; उस समय वे महामुनि व्रतधारी होकर कुशा पर बैठकर मंत्रोच्चार कर रहे थे।
 
Thereafter the king again saw him in another part of the forest; at that time the great sage, who was observing fasts, was sitting on a kusha mat and chanting mantras.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)