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mahabharat 13.56.20: उन्हें देखकर महाराज कुशिक अपनी पत्नी सहित बड़े हर्ष से आगे बढ़े। इसी बीच महर्षि च्यवन अन्तर्धान हो गए। उनके साथ उनकी शय्या भी अन्तर्धान हो गई।   |   mahabharat अध्याय 13.56: महर्षि च्यवनके प्रभावसे राजा कुशिक और उनकी रानीको अनेक आश्चर्यमय दृश्योंका दर्शन एवं च्यवन मुनिका प्रसन्न होकर राजाको वर माँगनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 56: महर्षि च्यवनके प्रभावसे राजा कुशिक और उनकी रानीको अनेक आश्चर्यमय दृश्योंका दर्शन एवं च्यवन मुनिका प्रसन्न होकर राजाको वर माँगनेके लिये कहना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  13.56.20 
तमभ्ययात् प्रहर्षेण नरेन्द्र: सह भार्यया।
अन्तर्हितस्ततो भूयश्च्यवन: शयनं च तत्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उन्हें देखकर महाराज कुशिक अपनी पत्नी सहित बड़े हर्ष से आगे बढ़े। इसी बीच महर्षि च्यवन अन्तर्धान हो गए। उनके साथ उनकी शय्या भी अन्तर्धान हो गई।
 
On seeing him, Maharaja Kushik along with his wife moved forward with great joy. In the meantime Maharishi Chyavana disappeared. Along with him, his bed also vanished.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)