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श्लोक 13.56.19  |
तस्मिन् विमाने सौवर्णे मणिस्तम्भसमाकुले।
महार्हे शयने दिव्ये शयानं भृगुनन्दनम्॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| भृगुनंदन च्यवन बहुमूल्य स्तंभों से युक्त स्वर्णमय विमान के अन्दर एक बहुमूल्य दिव्य मंच पर लेटे हुए थे। |
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| Bhrigunandan Chyawan was lying on a precious divine platform inside a golden plane with precious pillars. |
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