श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 56: महर्षि च्यवनके प्रभावसे राजा कुशिक और उनकी रानीको अनेक आश्चर्यमय दृश्योंका दर्शन एवं च्यवन मुनिका प्रसन्न होकर राजाको वर माँगनेके लिये कहना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.56.19 
तस्मिन् विमाने सौवर्णे मणिस्तम्भसमाकुले।
महार्हे शयने दिव्ये शयानं भृगुनन्दनम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
भृगुनंदन च्यवन बहुमूल्य स्तंभों से युक्त स्वर्णमय विमान के अन्दर एक बहुमूल्य दिव्य मंच पर लेटे हुए थे।
 
Bhrigunandan Chyawan was lying on a precious divine platform inside a golden plane with precious pillars.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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