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mahabharat 13.56.18: यह महान आश्चर्य क्या है जो मैं देख रहा हूँ?’ वह बार-बार ऐसा ही सोचता रहा। राजा जब ऐसा सोच रहा था, तभी उसकी दृष्टि महर्षि च्यवन पर पड़ी।   |   mahabharat अध्याय 13.56: महर्षि च्यवनके प्रभावसे राजा कुशिक और उनकी रानीको अनेक आश्चर्यमय दृश्योंका दर्शन एवं च्यवन मुनिका प्रसन्न होकर राजाको वर माँगनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 56: महर्षि च्यवनके प्रभावसे राजा कुशिक और उनकी रानीको अनेक आश्चर्यमय दृश्योंका दर्शन एवं च्यवन मुनिका प्रसन्न होकर राजाको वर माँगनेके लिये कहना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  13.56.18 
किंचेदं महदाश्चर्यं सम्पश्यामीत्यचिन्तयत्।
एवं संचिन्तयन्नेव ददर्श मुनिपुंगवम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
यह महान आश्चर्य क्या है जो मैं देख रहा हूँ?’ वह बार-बार ऐसा ही सोचता रहा। राजा जब ऐसा सोच रहा था, तभी उसकी दृष्टि महर्षि च्यवन पर पड़ी।
 
What is this great wonder that I am seeing?' He kept thinking like this again and again. While the king was thinking like this, his eyes fell on the great sage Chyavan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)