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mahabharat 13.56.17: अरे! क्या मैंने इस शरीर से परमपद प्राप्त कर लिया है अथवा पुण्यमय उत्तरकुरु या अमरावतीपुरी को प्राप्त हो गया हूँ? 17॥   |   mahabharat अध्याय 13.56: महर्षि च्यवनके प्रभावसे राजा कुशिक और उनकी रानीको अनेक आश्चर्यमय दृश्योंका दर्शन एवं च्यवन मुनिका प्रसन्न होकर राजाको वर माँगनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 56: महर्षि च्यवनके प्रभावसे राजा कुशिक और उनकी रानीको अनेक आश्चर्यमय दृश्योंका दर्शन एवं च्यवन मुनिका प्रसन्न होकर राजाको वर माँगनेके लिये कहना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  13.56.17 
अहो सह शरीरेण प्राप्तोऽस्मि परमां गतिम्।
उत्तरान् वा कुरून् पुण्यानथवाप्यमरावतीम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
अरे! क्या मैंने इस शरीर से परमपद प्राप्त कर लिया है अथवा पुण्यमय उत्तरकुरु या अमरावतीपुरी को प्राप्त हो गया हूँ? 17॥
 
Oh! Have I attained the supreme state through this body or have I reached the virtuous Uttarkuru or Amravatipuri? 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)