Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.56.16: उस अत्यन्त आश्चर्यमय दृश्य को देखकर राजा मन ही मन सोचने लगा - 'हाय! क्या यह स्वप्न है, या मेरे मन का भ्रम है, या यह सब सत्य है?॥16॥ | mahabharat अध्याय 13.56: महर्षि च्यवनके प्रभावसे राजा कुशिक और उनकी रानीको अनेक आश्चर्यमय दृश्योंका दर्शन एवं च्यवन मुनिका प्रसन्न होकर राजाको वर माँगनेके लिये कहना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस अत्यन्त आश्चर्यमय दृश्य को देखकर राजा मन ही मन सोचने लगा - 'हाय! क्या यह स्वप्न है, या मेरे मन का भ्रम है, या यह सब सत्य है?॥16॥
Seeing that most astonishing sight the king began to think to himself, 'Oh! Is this a dream, or is this an illusion in my mind, or is all this true?॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥