Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.56.1: भीष्म कहते हैं - हे राजन! रात्रि बीत जाने पर महामनस्वी राजा कुशिक उठे और प्रातःकाल के नित्य कर्मों से निवृत्त होकर अपनी रानी के साथ उस आश्रम की ओर चल पड़े। | mahabharat अध्याय 13.56: महर्षि च्यवनके प्रभावसे राजा कुशिक और उनकी रानीको अनेक आश्चर्यमय दृश्योंका दर्शन एवं च्यवन मुनिका प्रसन्न होकर राजाको वर माँगनेके लिये कहना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्म उवाच
तत: स राजा रात्र्यन्ते प्रतिबुद्धो महामना:।
कृतपूर्वाह्णिक: प्रायात् सभार्यस्तद् वनं प्रति॥ १॥
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - हे राजन! रात्रि बीत जाने पर महामनस्वी राजा कुशिक उठे और प्रातःकाल के नित्य कर्मों से निवृत्त होकर अपनी रानी के साथ उस आश्रम की ओर चल पड़े।
Bhishma says - O King! After the night had passed, the great-minded King Kushik woke up and after completing the daily rituals of the morning, he proceeded towards that hermitage along with his queen.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥