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mahabharat 13.55.67: उनसे घिरे हुए राजा कुशिक महान तेज से चमक रहे थे। उन्होंने बड़े हर्ष के साथ नगर में प्रवेश किया। उस समय बंदीगण उनकी स्तुति गा रहे थे। 67.   |   mahabharat अध्याय 13.55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.55.67 
तैर्वृत: कुशिको राजा श्रिया परमया ज्वलन्।
प्रविवेश पुरं हृष्ट: पूज्यमानोऽथ बन्दिभि:॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
उनसे घिरे हुए राजा कुशिक महान तेज से चमक रहे थे। उन्होंने बड़े हर्ष के साथ नगर में प्रवेश किया। उस समय बंदीगण उनकी स्तुति गा रहे थे। 67.
 
Surrounded by them, King Kushik was radiating with great radiance. He entered the city with great joy. At that time the prisoners were singing his praises. 67.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)