श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  13.55.63 
तव प्रसादसंवृत्तमिदं सर्वं महामुने।
नैतच्चित्रं तु भगवंस्त्वयि सत्यपराक्रम॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
महामुनि! यह सब आपकी कृपा से ही संभव हुआ है। भगवन्! आप सत्य और पराक्रम से परिपूर्ण हैं। आप जैसे तपस्वियों में ऐसी शक्ति होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है।॥ 63॥
 
‘Mahamuni! All this has been possible because of your grace. Bhagwan! You are the one who is full of truth and bravery. It is not surprising that ascetics like you have such power.'॥ 63॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)