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mahabharat 13.55.6: वह उसी जगह खड़ा होकर ऋषि के पैरों की मालिश करने लगा। इस बार ऋषि दूसरी तरफ सो रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 13.55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  13.55.6 
यथास्थानं च तौ स्थित्वा भूयस्तं संववाहतु:।
अथापरेण पार्श्वेन सुष्वाप स महामुनि:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वह उसी जगह खड़ा होकर ऋषि के पैरों की मालिश करने लगा। इस बार ऋषि दूसरी तरफ सो रहे थे।
 
He stood at the same place and started massaging the sage's feet. This time the sage was sleeping on the other side.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)