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mahabharat 13.55.58: ‘तुम मन में दुःखी न होओ । अब तुम्हारे कल्याण का समय आ गया है । तुम्हारे हृदय में जो भी इच्छा है, वह पूरी होगी ।’॥58॥   |   mahabharat अध्याय 13.55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  13.55.58 
न च मन्युस्त्वया कार्य: श्रेयस्ते समुपस्थितम्।
यत् काङ्क्षितं हृदिस्थं ते तत् सर्वं हि भविष्यति॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
‘तुम मन में दुःखी न होओ । अब तुम्हारे कल्याण का समय आ गया है । तुम्हारे हृदय में जो भी इच्छा है, वह पूरी होगी ।’॥58॥
 
‘You should not be sad in your heart. Now the time for your welfare has come. Whatever desire you have in your heart will be fulfilled.’॥ 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)