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mahabharat 13.55.57: ‘बेटा! अब तुम अपने नगर में जाओ और अपनी थकान मिटाकर कल प्रातःकाल अपनी पत्नी सहित यहाँ आ जाओ। हे मनुष्यों के स्वामी! कल तुम मुझे अपनी पत्नी सहित यहीं देखोगे।॥ 57॥   |   mahabharat अध्याय 13.55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  13.55.57 
गम्यतां स्वपुरं पुत्र विश्रान्त: पुनरेष्यसि।
इहस्थं मां सभार्यस्त्वं द्रष्टासि श्वो नराधिप॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
‘बेटा! अब तुम अपने नगर में जाओ और अपनी थकान मिटाकर कल प्रातःकाल अपनी पत्नी सहित यहाँ आ जाओ। हे मनुष्यों के स्वामी! कल तुम मुझे अपनी पत्नी सहित यहीं देखोगे।॥ 57॥
 
‘Son! Now go to your city and after getting rid of your tiredness come back here tomorrow morning with your wife. O Lord of men! Tomorrow you will see me here with my wife.॥ 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)