श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  13.55.52 
स्निग्धगम्भीरया वाचा भार्गव: सुप्रसन्नया।
ददानि वां वरं श्रेष्ठं तं ब्रूतामिति भारत॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
उस समय भृगुपुत्र च्यवन ने स्नेह और प्रसन्नता से परिपूर्ण गम्भीर वाणी में कहा - 'मैं तुम दोनों को उत्तम वर देना चाहता हूँ, कहो क्या दूँ?' ॥52॥
 
India At that time, Bhrigu's son Chyavan said in a serious voice full of affection and happiness - 'I want to give the best groom to both of you, tell me what should I give?' 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)