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तौ दृष्ट्वा पौरवर्गस्तु भृशं शोकसमाकुल:।
अभिशापभयत्रस्तो न च किंचिदुवाच ह॥ ४५॥
अनुवाद
नगर के लोग उन दोनों की यह दुर्दशा देखकर अत्यंत दुःखी हुए। सभी लोग ऋषि के शाप से भयभीत थे, इसलिए कोई कुछ नहीं बोल रहा था।
The people of the city were extremely saddened to see the plight of these two. Everyone was afraid of the sage's curse; therefore no one was saying anything. 45.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥