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mahabharat 13.55.44: महाराज! वे दोनों बुरी तरह घायल हो गए थे। उनकी पीठ पर लगे अनेक घावों से रक्त बह रहा था। रक्त से लथपथ होने के कारण वे खिले हुए पलाश के फूलों के समान प्रतीत हो रहे थे। 44.   |   mahabharat अध्याय 13.55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.55.44 
बहुशो भृशविद्धौ तौ स्रवन्तौ च क्षतोद्भवम्।
ददृशाते महाराज पुष्पिताविव किंशुकौ॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! वे दोनों बुरी तरह घायल हो गए थे। उनकी पीठ पर लगे अनेक घावों से रक्त बह रहा था। रक्त से लथपथ होने के कारण वे खिले हुए पलाश के फूलों के समान प्रतीत हो रहे थे। 44.
 
Maharaj! Both of them were badly injured. Blood was flowing from the many wounds on their backs. Due to being soaked in blood, they looked like blooming Palaash flowers. 44.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)