Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.55.40-41: राजा की आज्ञा पाकर नाना प्रकार के रत्न, स्त्रियाँ, वाहन, बकरियाँ, भेड़ें, स्वर्णाभूषण, सोना और पर्वत शिखर पर स्थित हाथी - सभी ऋषि के पीछे-पीछे चल पड़े। राजा के सभी मंत्री भी इन वस्तुओं के साथ थे। उस समय सारा नगर वेदना से कराह रहा था। | mahabharat अध्याय 13.55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततो रत्नान्यनेकानि स्त्रियो युग्यमजाविकम्।
कृताकृतं च कनकं गजेन्द्राश्चाचलोपमा:॥ ४०॥
अन्वगच्छन्त तमृषिं राजामात्याश्च सर्वश:।
हाहाभूतं च तत् सर्वमासीन्नगरमार्तवत्॥ ४१॥
अनुवाद
राजा की आज्ञा पाकर नाना प्रकार के रत्न, स्त्रियाँ, वाहन, बकरियाँ, भेड़ें, स्वर्णाभूषण, सोना और पर्वत शिखर पर स्थित हाथी - सभी ऋषि के पीछे-पीछे चल पड़े। राजा के सभी मंत्री भी इन वस्तुओं के साथ थे। उस समय सारा नगर वेदना से कराह रहा था।
Following the king's orders, various kinds of gems, women, vehicles, goats, sheep, golden ornaments, gold and a mountain-top elephant - all followed the sage. All the king's ministers were also with these things. At that time, the entire city was crying in anguish. 40-41.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥