vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना
»
श्लोक 4
श्लोक
13.55.4
अथ शून्येन मनसा प्रविश्य स्वगृहं नृप:।
ददर्श शयने तस्मिन् शयानं भृगुनन्दनम्॥ ४॥
अनुवाद
जब राजा ने शून्य मन से घर में प्रवेश किया तो देखा कि भृगुनन्दन महर्षि च्यवन पुनः उसी शय्या पर सो रहे हैं॥4॥
When the king entered the house with an empty mind, he saw Bhrigunandan Maharishi Chyavan again sleeping on the same bed. 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×