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mahabharat 13.55.39: ऋषि के ये वचन सुनकर राजा ने अपने सेवकों से कहा, 'ऋषि जो भी आज्ञा दें, उसे बिना किसी संकोच के दे दो।'   |   mahabharat अध्याय 13.55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  13.55.39 
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा राजा भृत्यांस्तथाब्रवीत्।
यद्यद् ब्रूयान्मुनिस्तत्तत् सर्वं देयमशङ्कितै:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
ऋषि के ये वचन सुनकर राजा ने अपने सेवकों से कहा, 'ऋषि जो भी आज्ञा दें, उसे बिना किसी संकोच के दे दो।'
 
On hearing these words of the sage, the king said to his servants, 'Whatever the sage commands, give it to him without any hesitation.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)