श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  13.55.38 
सर्वान् दास्याम्यशेषेण धनं रत्नानि चैव हि।
क्रियतां निखिलेनैतन्मा विचारय पार्थिव॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
मैं सबको उनकी इच्छानुसार धन और रत्न बाँटूँगा। अतः आप सबकी पूरी व्यवस्था कर दीजिए। हे पृथ्वीनाथ! आप मन में ऐसा विचार न कीजिए।॥38॥
 
I will distribute wealth and gems to everyone according to their wishes. So make full arrangements for all of them. Prithvinath! Do not think about this in your mind.'॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)