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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना
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श्लोक 34
श्लोक
13.55.34
भगवन् क्व रथो यातु ब्रवीतु भृगुनन्दन।
यत्र वक्ष्यसि विप्रर्षे तत्र यास्यति ते रथ:॥ ३४॥
अनुवाद
हे प्रभु! भृगुपुत्र! मुझे बताइए, यह रथ कहाँ जाए? हे ब्रह्मर्षि! आप जहाँ कहेंगे, आपका रथ वहीं जाएगा।॥ 34॥
Lord! Bhrigu's son! Tell me, where should this chariot go? O Brahmarshi! Your chariot will go wherever you tell it to.'॥ 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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