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mahabharat 13.55.33: उस रथ पर उसने एक चाबुक भी रखा जिसके आगे तीन बाण थे और जिसकी नोक सुई की नोक के समान तीक्ष्ण थी। ये सब वस्तुएँ प्रस्तुत करके राजा ने पूछा-॥33॥   |   mahabharat अध्याय 13.55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  13.55.33 
त्रिदण्डं वज्रसूच्यग्रं प्रतोदं तत्र चादधत्।
सर्वमेतत् तथा दत्त्वा नृपो वाक्यमथाब्रवीत्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
उस रथ पर उसने एक चाबुक भी रखा जिसके आगे तीन बाण थे और जिसकी नोक सुई की नोक के समान तीक्ष्ण थी। ये सब वस्तुएँ प्रस्तुत करके राजा ने पूछा-॥33॥
 
He also placed on that chariot a whip which had three shafts in the front and its tip was as sharp as the tip of a needle. After presenting all these things, the king asked -॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)