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mahabharat 13.55.30: राजा! यथाशीघ्र अपना युद्ध रथ तैयार करो। उसमें नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र रखे जाएँ। ध्वजा, शक्ति और स्वर्ण दण्ड भी उपस्थित हों। 30॥   |   mahabharat अध्याय 13.55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  13.55.30 
सज्जीकुरु रथं क्षिप्रं यस्ते सांग्रामिको मत:।
सायुध: सपताकश्च शक्तीकनकयष्टिमान्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
राजा! यथाशीघ्र अपना युद्ध रथ तैयार करो। उसमें नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र रखे जाएँ। ध्वजा, शक्ति और स्वर्ण दण्ड भी उपस्थित हों। 30॥
 
King! Prepare your war chariot as soon as possible. Various types of weapons should be kept in it. The flag, power and golden rod should be present. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)