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mahabharat 13.55.26-27: अनेक प्रकार के वस्त्र लाकर उन्हें अर्पित किए गए। जब ​​च्यवन ऋषि को इन सब कार्यों में कोई दोष न दिखा, तब उन्होंने राजा कुशिक से कहा, 'आप अपनी पत्नी सहित रथ पर सवार हो जाइए और मुझे शीघ्र ही उस स्थान पर ले चलिए जहाँ मैं कहूँ।'॥ 26-27॥   |   mahabharat अध्याय 13.55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना  »  श्लोक 26-27
 
 
श्लोक  13.55.26-27 
वस्त्रं च विविधाकारमभवत् समुपार्जितम्।
न शशाक ततो द्रष्टुमन्तरं च्यवनस्तदा॥ २६॥
पुनरेव च विप्रर्षि: प्रोवाच कुशिकं नृपम्।
सभार्यो मां रथेनाशु वह यत्र ब्रवीम्यहम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
अनेक प्रकार के वस्त्र लाकर उन्हें अर्पित किए गए। जब ​​च्यवन ऋषि को इन सब कार्यों में कोई दोष न दिखा, तब उन्होंने राजा कुशिक से कहा, 'आप अपनी पत्नी सहित रथ पर सवार हो जाइए और मुझे शीघ्र ही उस स्थान पर ले चलिए जहाँ मैं कहूँ।'॥ 26-27॥
 
Many kinds of clothes were brought and offered to him. When the sage Chyavan could not find any fault in all these activities, he then said to the king Kushik, 'You get into the chariot along with your wife and take me quickly to the place I say.'॥ 26-27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)