श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.55.2 
भीष्म उवाच
अदृष्ट्वा स महीपालस्तमृषिं सह भार्यया।
परिश्रान्तो निववृते व्रीडितो नष्टचेतन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले- हे राजन! जब राजा और उनकी पत्नी ने ऋषि को बहुत खोजा, परन्तु वे न मिले, तब वे थककर लौट आए। उस समय उन्हें बड़ी लज्जा आ रही थी। वे लगभग अचेत हो गए थे॥2॥
 
Bhishmaji said-O King! When the king and his wife searched a lot for the sage but could not find him, they returned tired. At that time they were feeling very embarrassed. They almost became unconscious.॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)