श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना  »  श्लोक 17-20
 
 
श्लोक  13.55.17-20 
मांसप्रकारान् विविधान् शाकानि विविधानि च।
वेसवारविकारांश्च पानकानि लघूनि च॥ १७॥
रसालापूपकांश्चित्रान् मोदकानथ खाण्डवान्।
रसान् नानाप्रकारांश्च वन्यं च मुनिभोजनम्॥ १८॥
फलानि च विचित्राणि राजभोज्यानि भूरिश:।
बदरेङ्गुदकाश्मर्यभल्लातकफलानि च॥ १९॥
गृहस्थानां च यद् भोज्यं यच्चापि वनवासिनाम्।
सर्वमाहारयामास राजा शापभयात् तत:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
नाना प्रकार के फलों के गूदे, नाना प्रकार की सब्जियाँ, अनेक प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन, हल्के पेय पदार्थ, स्वादिष्ट पूड़ियाँ, विचित्र मोदक (लड्डू), चीनी, नाना प्रकार के रस, ऋषियों के योग्य जंगली कंद-मूल, विचित्र फल, राजाओं द्वारा सेवन की जाने वाली अनेक प्रकार की वस्तुएँ, बेर, इंगुद, काश्मार्य, भल्लाट फल तथा गृहस्थों और वानप्रस्थों के लिए भोजन-ये सब राजा ने शाप के भय से मँगवाकर प्रस्तुत कर दिए थे॥17-20॥
 
Pulps of various kinds of fruits, different kinds of vegetables, many kinds of delicacies, light beverages, tasty puri, strange modakas (laddus), sugar, various kinds of juices, wild tubers and roots fit for sages, strange fruits, many kinds of items consumed by kings, ber, ingud, kashmarya, bhallata fruits and foodstuffs for householders and vanaprasthas - the king had called for and presented everything out of fear of the curse.॥17-20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)