Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.55.11: जब भृगु पुत्र ने देखा कि इतना सब होने पर भी राजा और रानी के मन में कोई अशांति नहीं है तो वह अचानक उठकर स्नानागार में चला गया।   |   mahabharat अध्याय 13.55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  13.55.11 
यदा तौ निर्विकारौ तु लक्षयामास भार्गव:।
तत उत्थाय सहसा स्नानशालां विवेश ह॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जब भृगु पुत्र ने देखा कि इतना सब होने पर भी राजा और रानी के मन में कोई अशांति नहीं है तो वह अचानक उठकर स्नानागार में चला गया।
 
When Bhrigu's son saw that even after all this there was no disturbance in the minds of the king and the queen, he suddenly got up and went to the bathroom.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)