Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.55.10: ऋषि प्रसन्नतापूर्वक बैठ गए और दम्पति मौन रहकर अपने शरीर पर तेल मलने लगे। परन्तु महातपस्वी भृगुपुत्र च्यवन ने एक बार भी अपने मुख से यह नहीं कहा कि 'बस, अब छोड़ो, तेल मालिश पूरी हो गई।' ॥10॥ | mahabharat अध्याय 13.55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: सुखासीनमृषिं वाग्यतौ संववाहतु:।
न च पर्याप्तमित्याह भार्गव: सुमहातपा:॥ १०॥
अनुवाद
ऋषि प्रसन्नतापूर्वक बैठ गए और दम्पति मौन रहकर अपने शरीर पर तेल मलने लगे। परन्तु महातपस्वी भृगुपुत्र च्यवन ने एक बार भी अपने मुख से यह नहीं कहा कि 'बस, अब छोड़ो, तेल मालिश पूरी हो गई।' ॥10॥
The sage sat down happily and the couple remained silent and started rubbing oil on their bodies. But the great ascetic Bhrigu's son Chyavana did not even once say from his mouth that 'Enough, leave it now, the oil massage is complete'. 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥