श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 54: राजा कुशिक और उनकी रानीके द्वारा महर्षि च्यवनकी सेवा  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  13.54.6 
कथं पुत्रानतिक्रम्य तेषां नप्तृष्वथाभवत्।
एष दोष: सुतान् हित्वा तत्त्वं व्याख्यातुमर्हसि॥ ६॥
 
 
अनुवाद
राजा कुशिक और महर्षि ऋचीक अपने-अपने वंश के संस्थापक थे। उनके पुत्र गाधि और जमदग्नि को छोड़कर उनके पौत्र विश्वामित्र और परशुराम में यह बहिर्विवाह दोष क्यों उत्पन्न हुआ? इसका वास्तविक कारण बताइए।॥6॥
 
King Kushik and Maharishi Richik were the founders of their respective dynasties. Why did this defect of exogamy arise in their grandsons Vishwamitra and Parashurama, leaving behind their sons Gadhi and Jamadagni? Explain the real reason behind this.॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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