श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 54: राजा कुशिक और उनकी रानीके द्वारा महर्षि च्यवनकी सेवा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.54.4 
तदस्य सम्भवं राजन् निखिलेनानुकीर्तय।
कौशिकाच्च कथं वंशात् क्षत्राद् वै ब्राह्मणो भवेत्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
अतः हे राजन! कृपया परशुराम की उत्पत्ति के विषय में विस्तारपूर्वक बताइए। राजा कुशिक का वंश क्षत्रिय था, उनसे ब्राह्मण जाति की उत्पत्ति कैसे हुई?॥4॥
 
Therefore, O King! Please tell us in detail about the origin of Parashurama. King Kushik's lineage was Kshatriya, how did the Brahmin caste originate from him?॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)