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कुछ देर बाद पराक्रमी राजा शांत होकर उठ खड़ा हुआ और अपनी रानी को साथ लेकर ऋषि को खोजने के लिए पुनः प्रयत्न करने लगा।
After some time the mighty king regained his composure and stood up. Taking his queen along with him, he again made great efforts to search for the sage.
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि च्यवनकुशिकसंवादे द्विपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दान-धर्म-पर्वमें च्यवन और कुशिकका संवादविषयक बावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥