श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 54: राजा कुशिक और उनकी रानीके द्वारा महर्षि च्यवनकी सेवा  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  13.54.39 
स मुहूर्तं समाश्वस्य सह देव्या महाद्युति:।
पुनरन्वेषणे यत्नमकरोत् परमं तदा॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
कुछ देर बाद पराक्रमी राजा शांत होकर उठ खड़ा हुआ और अपनी रानी को साथ लेकर ऋषि को खोजने के लिए पुनः प्रयत्न करने लगा।
 
After some time the mighty king regained his composure and stood up. Taking his queen along with him, he again made great efforts to search for the sage.
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि च्यवनकुशिकसंवादे द्विपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दान-धर्म-पर्वमें च्यवन और कुशिकका संवादविषयक बावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५२॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)