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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 54: राजा कुशिक और उनकी रानीके द्वारा महर्षि च्यवनकी सेवा  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  13.54.37 
तमन्वगच्छतां तौ च क्षुधितौ श्रमकर्शितौ।
भार्यापती मुनिश्रेष्ठस्तावेतौ नावलोकयत्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
राजा-रानी भूखे और कठिन परिश्रम के कारण दुर्बल हो गए थे, फिर भी वे ऋषि के पीछे-पीछे गए, किन्तु ऋषि ने उनकी ओर देखा तक नहीं।
 
The king and queen were hungry and weak due to hard work. Even then they followed the sage, but the great sage did not even look at them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)