श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 54: राजा कुशिक और उनकी रानीके द्वारा महर्षि च्यवनकी सेवा  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  13.54.34 
तत: स भगवान‍् विप्र: समादिश्य नराधिपम्।
सुष्वापैकेन पार्श्वेन दिवसानेकविंशतिम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
उधर राजा च्यवन को अपनी सेवा करने का आदेश देकर ब्रह्मर्षि भगवान् इक्कीस दिन तक एक ही करवट सोते रहे ॥34॥
 
On the other hand, after ordering King Chyavan to serve him, Brahmarshi Bhagwan kept sleeping on the same side for twenty-one days. ॥ 34॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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