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श्लोक 13.54.34  |
तत: स भगवान् विप्र: समादिश्य नराधिपम्।
सुष्वापैकेन पार्श्वेन दिवसानेकविंशतिम्॥ ३४॥ |
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| अनुवाद |
| उधर राजा च्यवन को अपनी सेवा करने का आदेश देकर ब्रह्मर्षि भगवान् इक्कीस दिन तक एक ही करवट सोते रहे ॥34॥ |
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| On the other hand, after ordering King Chyavan to serve him, Brahmarshi Bhagwan kept sleeping on the same side for twenty-one days. ॥ 34॥ |
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