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mahabharat 13.54.31: उस समय भृगुपुत्र ने उनसे कहा - 'तुम लोग मुझे सोते समय मत जगाना। मेरे पैरों की मालिश करते रहना और तुम भी हर समय जागते रहना।'॥31॥   |   mahabharat अध्याय 13.54: राजा कुशिक और उनकी रानीके द्वारा महर्षि च्यवनकी सेवा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 54: राजा कुशिक और उनकी रानीके द्वारा महर्षि च्यवनकी सेवा  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  13.54.31 
न प्रबोध्योऽस्मि संसुप्त इत्युवाचाथ भार्गव:।
संवाहितव्यौ मे पादौ जागृतव्यं च तेऽनिशम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
उस समय भृगुपुत्र ने उनसे कहा - 'तुम लोग मुझे सोते समय मत जगाना। मेरे पैरों की मालिश करते रहना और तुम भी हर समय जागते रहना।'॥31॥
 
At that time, Bhrigu's son said to them, 'You guys should not wake me up while I am sleeping. Keep massaging my feet and you should also remain awake all the time.'॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)