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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 54: राजा कुशिक और उनकी रानीके द्वारा महर्षि च्यवनकी सेवा  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  13.54.30 
तत: शय्यागृहं प्राप्य भगवानृषिसत्तम:।
संविवेश नरेशस्तु सपत्नीक: स्थितोऽभवत्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महर्षि भगवान च्यवन अपने शयन कक्ष में जाकर सो गये और राजा कुशिक अपनी पत्नी सहित उनकी सेवा में खड़े रहे।
 
Thereafter, the great sage Lord Chyavan went to his bedroom and went to sleep, and King Kushika along with his wife stood serving him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)