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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 54: राजा कुशिक और उनकी रानीके द्वारा महर्षि च्यवनकी सेवा  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  13.54.27 
तत: स परया प्रीत्या प्रत्युवाच नराधिपम्।
औपपत्तिकमाहारं प्रयच्छस्वेति भारत॥ २७॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर भरत नन्द ने बड़ी प्रसन्नता से राजा से कहा- 'आपके यहाँ जो भी भोजन तैयार हो, उसे ले आइए।'
 
On hearing this, Bharata Nanda said to the king with great pleasure - 'Whatever food is ready at your place, bring it.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)