श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 54: राजा कुशिक और उनकी रानीके द्वारा महर्षि च्यवनकी सेवा  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  13.54.11 
कुशिक उवाच
भगवन् सहधर्मोऽयं पण्डितैरिह धार्यते।
प्रदानकाले कन्यानामुच्यते च सदा बुधै:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
कुशिकाने कहा - प्रभु ! समान धर्मवाले विद्वान् पुरुष यहाँ अतिथि सेवा के रूप में इसे सदैव धारण करते हैं और बुद्धिमान् पुरुष कन्याओं के विवाहकाल में अर्थात् उनके विवाह के समय इसका सदैव उपदेश करते हैं ॥11॥
 
Kushikane said – Lord! Learned men of the same religion always wear this in the form of guest service here and the wise men always preach it during the period of marriage of the girls i.e. at the time of their marriage. 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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