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श्लोक 13.54.1  |
युधिष्ठिर उवाच
संशयो मे महाप्राज्ञ सुमहान् सागरोपम:।
तं मे शृणु महाबाहो श्रुत्वा व्याख्यातुमर्हसि॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| युधिष्ठिर ने पूछा- हे महामना! मेरे मन में समुद्र के समान विशाल संदेह उत्पन्न हो गया है। हे महामना! कृपया इसे सुनें और इसका वर्णन करें।॥1॥ |
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| Yudhishthira asked- O mighty one! A doubt as vast as the ocean has arisen in my mind. O great one! Please listen to it and explain it.॥ 1॥ |
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