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mahabharat 13.53.d2: आप जानते हैं कि जो लोग संकट में पड़े प्राणियों को बचाते हैं, उन्हें सबसे उत्तम गति कहाँ मिलती है। हम नरक में हैं। आज आप ही हमें शरण दे सकते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति  »  श्लोक d2
 
 
श्लोक  13.53.d2 
(अत्यन्तापदि मग्नानां परित्राणं हि कुर्वताम्।
( या गतिर्विदिता त्वद्य नरके शरणं भवान्॥ )
 
 
अनुवाद
आप जानते हैं कि जो लोग संकट में पड़े प्राणियों को बचाते हैं, उन्हें सबसे उत्तम गति कहाँ मिलती है। हम नरक में हैं। आज आप ही हमें शरण दे सकते हैं।
 
You know the best destination that is attained by those who rescue the beings who are in dire trouble. We are in hell. Today, you are the only one who can give us shelter.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)