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mahabharat 13.53.46: नरेशवर! नाविक और मछली स्वर्गलोक को चले गए और राजा नहुष भी वरदान पाकर अपनी राजधानी को लौट आए॥46॥   |   mahabharat अध्याय 13.53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  13.53.46 
निषादाश्च दिवं जग्मुस्ते च मत्स्या जनाधिप।
नहुषोऽपि वरं लब्ध्वा प्रविवेश स्वकं पुरम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
नरेशवर! नाविक और मछली स्वर्गलोक को चले गए और राजा नहुष भी वरदान पाकर अपनी राजधानी को लौट आए॥46॥
 
Nareshwar! The sailor and the fish went to heaven and King Nahusha also returned to his capital after getting the boon. 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)