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mahabharat 13.53.44: तब उनके आग्रह करने पर इन्द्र के समान तेजस्वी राजा ने धर्म में दृढ़ रहने का वर माँगा और उनके ‘तथास्तु’ कहने पर राजा ने विधिपूर्वक उन दोनों ऋषियों की पूजा की ॥ 44॥   |   mahabharat अध्याय 13.53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  13.53.44 
ततो जग्राह धर्मे स स्थितिमिन्द्रनिभो नृप:।
तथेति चोदित: प्रीतस्तावृषी प्रत्यपूजयत्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
तब उनके आग्रह करने पर इन्द्र के समान तेजस्वी राजा ने धर्म में दृढ़ रहने का वर माँगा और उनके ‘तथास्तु’ कहने पर राजा ने विधिपूर्वक उन दोनों ऋषियों की पूजा की ॥ 44॥
 
Then, on their insistence, the king, as illustrious as Indra, asked for the boon to remain steadfast in Dharma, and on their saying 'Tathastu', the king worshipped the two sages in a proper manner. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)