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mahabharat 13.53.43: तब महाबली राजा नहुष प्रसन्न होकर बोले, 'आपकी कृपा बहुत है।'   |   mahabharat अध्याय 13.53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  13.53.43 
ततो राजा महावीर्यो नहुष: पृथिवीपति:।
परमित्यब्रवीत् प्रीतस्तदा भरतसत्तम॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
तब महाबली राजा नहुष प्रसन्न होकर बोले, 'आपकी कृपा बहुत है।'
 
Bharatbhushan! Then the mighty King Nahush became happy and said, 'Your kindness is enough.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)