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mahabharat 13.53.41: हे भरतश्रेष्ठ! उस समय उन मल्लाहों और मत्स्यों को भी स्वर्ग की ओर जाते देखकर राजा नहुष को बड़ा आश्चर्य हुआ ॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 13.53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  13.53.41 
तत: स राजा नहुषो विस्मित: प्रेक्ष्य धीवरान्।
आरोहमाणांस्त्रिदिवं मत्स्यांश्च भरतर्षभ॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! उस समय उन मल्लाहों और मत्स्यों को भी स्वर्ग की ओर जाते देखकर राजा नहुष को बड़ा आश्चर्य हुआ ॥ 41॥
 
O best of the Bharatas! At that time King Nahusha was very surprised to see those boatmen and fishes also going towards the heaven. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)