Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.53.4: तत्पश्चात् राजा नहुष ने कहा, "हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! मुझे बताइए, आपका कौन-सा प्रिय कार्य मुझे करना चाहिए? हे प्रभु! आपकी आज्ञा से वह कार्य चाहे कितना ही कठिन क्यों न हो, मैं उसे अवश्य पूरा करूँगा।" | mahabharat अध्याय 13.53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्गति । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नहुष उवाच
करवाणि प्रियं किं ते तन्मे ब्रूहि द्विजोत्तम।
सर्वं कर्तास्मि भगवन् यद्यपि स्यात् सुदुष्करम्॥ ४॥
अनुवाद
तत्पश्चात् राजा नहुष ने कहा, "हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! मुझे बताइए, आपका कौन-सा प्रिय कार्य मुझे करना चाहिए? हे प्रभु! आपकी आज्ञा से वह कार्य चाहे कितना ही कठिन क्यों न हो, मैं उसे अवश्य पूरा करूँगा।"
After that King Nahush said- O best of Brahmins! Tell me, which of your favourite tasks should I do? O Lord! With your permission, no matter how difficult the task may be, I will complete it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥