श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  13.53.39 
प्रतिगृह्णामि वो धेनुं कैवर्ता मुक्तकिल्बिषा:।
दिवं गच्छत वै क्षिप्रं मत्स्यै: सह जलोद्भवै:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
हे मल्लाहो! मैं तुम्हारे द्वारा दी गई गाय को स्वीकार करता हूँ। इस गौदान के प्रभाव से तुम्हारे सभी पाप नष्ट हो गए हैं। अब तुम सब जल में उत्पन्न इन मछलियों सहित शीघ्र ही स्वर्ग जा सकते हो ॥39॥
 
O boatmen! I accept the cow given by you. Due to the effect of this cow donation, all your sins have been destroyed. Now you all can go to heaven quickly along with these fishes born in water. ॥ 39॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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