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mahabharat 13.53.37: हे विद्वान्! हम आपके चरणों में सिर झुकाकर आपको प्रसन्न करना चाहते हैं। कृपया हमें आशीर्वाद देने के लिए हमारी दी हुई यह गाय स्वीकार करें ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 13.53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  13.53.37 
प्रसादयामहे विद्वन् भवन्तं प्रणता वयम्।
अनुग्रहार्थमस्माकमियं गौ: प्रतिगृह्यताम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
हे विद्वान्! हम आपके चरणों में सिर झुकाकर आपको प्रसन्न करना चाहते हैं। कृपया हमें आशीर्वाद देने के लिए हमारी दी हुई यह गाय स्वीकार करें ॥37॥
 
Scholar! We want to please you by bowing our heads at your feet. Please accept this cow given by us to bless us. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)