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श्लोक 13.53.31  |
तेजसा वपुषा चैव गावो वह्निसमा भुवि।
गावो हि सुमहत् तेज: प्राणिनां च सुखप्रदा:॥ ३१॥ |
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| अनुवाद |
| इस पृथ्वी पर गौएँ अग्नि के समान शरीर और तेज से युक्त हैं। वे तेज की महान् स्रोत हैं और समस्त प्राणियों को सुख प्रदान करती हैं ॥31॥ |
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| On this earth, cows are like fire in their body and radiance. They are a great source of brilliance and give happiness to all creatures. ॥ 31॥ |
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