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mahabharat 13.53.31: इस पृथ्वी पर गौएँ अग्नि के समान शरीर और तेज से युक्त हैं। वे तेज की महान् स्रोत हैं और समस्त प्राणियों को सुख प्रदान करती हैं ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 13.53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  13.53.31 
तेजसा वपुषा चैव गावो वह्निसमा भुवि।
गावो हि सुमहत् तेज: प्राणिनां च सुखप्रदा:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
इस पृथ्वी पर गौएँ अग्नि के समान शरीर और तेज से युक्त हैं। वे तेज की महान् स्रोत हैं और समस्त प्राणियों को सुख प्रदान करती हैं ॥31॥
 
On this earth, cows are like fire in their body and radiance. They are a great source of brilliance and give happiness to all creatures. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)